चौखट हूँ मैं's image
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तेरी आवाज़ की चौखट हूँ मैं,

तेरे दीद का तलबगार हूँ मैं।

जब तलक तू सामने न होगा,

सब तरफ धुंआ धुंआ होगा।

जब कभी महफ़िल जिक्र होगा,

दिल के अरमां फिर जवां होगें।

एक बार आ के देख तो ले,

फिर न जाने कौन कहाँ होगा।

हम न होगें मगर बाद मेरे,

किस्से हमारे लबे जहाँ होगें


©गोपाल भोजक

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