बड़ा दिलकश ज़माना था's image
Love PoetryPoetry1 min read

बड़ा दिलकश ज़माना था

गोपाल भोजकगोपाल भोजक April 1, 2022
Share0 Bookmarks 94 Reads0 Likes

बहुत हसीन दौर था,

बड़ा रंगीन ज़माना था।

निगाहें इश्क करती थी,

वो भी क्या ज़माना था।

लबों पे शौखियां होती थी,

फ़िज़ा भी महका करती थी।

धड़कने बात करती थी,

बड़ा दिलकश ज़माना था।

©गोपाल भोजक



No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts