आँखों को समझाये कौन's image
Love PoetryPoetry1 min read

आँखों को समझाये कौन

गोपाल भोजकगोपाल भोजक December 5, 2021
Share0 Bookmarks 94 Reads0 Likes

दिल को बहुत तसल्ली दी

आँखों को समझाये कौन।

यारों संग दिन गुज़र जाते है,

रात को हम गुजारे कैसे,

भीगा तकिया समझता रहा,

हमने उसकी बात नही मानी।

जानता हूँ कि तू गैर है लेकिन,

दिल ने कभी ये बात नही मानी।


©गोपाल भोजक

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts