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वह एक लाख और वह चार करोड़

girvaani.pranikyaagirvaani.pranikyaa January 26, 2023
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वह एक लाख और वह चार करोड़

तालिबान का हमला कोई नई बात नहीं है। अक्सर हम लोग अख़बार और टीवी पर पड़ते व सुनते है कि इस देश पर हमला उस देश पर कब्जा इत्यादि। तालिबान अरबी भाषा का शब्द है जो तलब से बना है। तलब का अर्थ होता है किसी चीज को हासिल करने की इच्छा। 90 के दशक में जब अफगानिस्तान लड़ाई का दंश झेल रहा था, तब ये तालिबान का जन्म हुआ। तालिबान लंबे समय से अफगानिस्तान में लड़ाई लड़ रहा है। इससे जुड़े लोगों ने पहले सोवियत संघ के खिलाफ लड़ाई लड़ी और उसके बाद एक संगठन के रूप में अमेरिका से व अन्य देशों से भी । तालिबान ने एक बार पहले भी अफगानिस्तान में तख्तापलट किया और अब वो फिर वहाँ राज कर रहा है। वहाँ डर, लाचारी, खौफ और खून का खेल चल रहा है।सभी लोग किसी भी तरह अफगानिस्तान छोड़ना चाहते हैं। वहाँ की सरकार और फौज पहले ही हाथ खड़ी कर चुकी है। ऐसे में अन्य देशों ने अपने नागरिकों को निकलना शुरू कर दिया है। परंतु क्या किसी ने सोचा है कि अफ़ग़ानियों का क्या होगा ? उनका क्या दोष है ? यह सत्य है कि अमेरिका ने उनकी 20 साल मदद की है परंतु उसमें उसका स्वयं का स्वार्य था। अब अमेरिका ने भी अपनी सेना हटा दी है। क्या एकदम से सेना हटाकर उन्हें संभलने तक का वक़्त न देना कैसे सही है। बच्चा जब चलना शुरू करता है और थोड़े समय के बाद चलने लगता है फिर भी माता-पिता आस-पास रहते हैं कि क्या पता डगमगा जाए। देशभक्ति का न होना अफगानिस्तान में तालिबान का राज होने का एक मुख्य कारण है । वहाँ के राष्ट्रपति अशरफ गनी पैसा ले कर भाग गए सेना ने भी संघर्ष नहीं किया। वहाँ की जनता के अंदर देश भक्ति के भाव को जगाना होगा।बाताना होगा की वो कम नहीं हैं। तालिबान एक लाख हैं लेकिन वो चार करोड़ हैं। गुरु गोबिंद सिंह जी ने कहा था -

"सवा लाख से एक लड़ाऊं,

चिड़ियन ते मैं बाज तुड़ाऊं,

तबै गुरु गोबिंद सिंह नाम कहाऊं"

मनुष्य को अपनी मदद स्वयं करनी पड़ती है। जो स्वयं की मदद नहीं करते उनकी ईश्वर भी मदद नहीं करता । जो अधर्म को सहते हैं वो स्वयं अधर्मी कहलाते हैं। एकता मैं अनेकता होती है ।यदि सारे अफगानी नागरिक एक होके युद्ध लड़े तो तालिबान को भी भगा सकते हैं। अफगानी ही क्यों ? क्या बाकि देशो धर्म नहीं है अपने पड़ोसी देश की मदद करना।  लोगों को आश्वाशन देना कि सब उनके साथ हैं वो कदम तो बढ़ायें तो अपने आप उनकी डगर साफ होती जाएगी। कुछ पाने के लिए बलिदान तो देना पड़ता है। एक सर झुकता है तो सौ काटते हैं  और एक सर उठता है तो हजार उठते हैं। । एक चीटी हाथी की जान तक ले सकती है फिर वो तो चार करोड़ नागरिक हैं। इस वक्त जरूरत है एकता की पूरे विश्व को गिले शिकवे मिटा कर एक होना होगाअफ़ग़ानियों की सिर्फ मदत ही नहीं उन्हें उत्साहित करना होगा उनके अंदर देश भक्ति के भाव को जगाना होगा। तालिबान को मुँह तोड़ जवाब देना होगा ताकि और देशों में ऐसा न हो।  

धन्यवाद 



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