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खिलौना

भोले…… ओ भोले.... अब समझ आया,
तेरा वो खास दोस्त कान्हा हमेशा कर्मा-कर्मा क्यु करता है ? 
अब मैंने जाना इन्सान जो करता है वही भरता है |

भोले बोले,

“ देख यह ज्ञान मैंने ही बनाया है ,
तो यह बता के मेरे दिमाग की पत्ती मत हटा,
और जो हुआ है ;  साफ – साफ बता |”

मैं बोला, 
        कल मुझे घर की सफाई करते हुए 
मेरा बचपन का पंसदीदा खिलौना दिखा, 
और वह मुझे मायूस देख जोर से चिखा |
मैने कहा अच्छा हुआ यार तू मिल गया,
        क्योंकि मेरा  जो हमसफर है ना,
वो अब ना मुझसे पहले की तरह बोलता है,
ना मेरे साथ हँसता है, ना मुझे पहले जैसे                  झेलता है |
‘खिलौना’   हस दिया और बोल पडा,
मालिक अब पता चला कैसे लगता है,
जब कोई आपके साथ खेलता है |

भोले बोले अरे मेरे रोंदु ,
मेरा पुरा किरदार सामने होके भी ;
तुझे इतनी सी बात समझ में न आती है |
जहा खुद मेरे साथ लोग खेल गए,
वहा तू किस झाँड की पाती है ||
 
अरे खुद बिमार से ही माँग रहा है तू  बिमारी का हल, 
अमृत-पान के वक्त किसी को मेरी याद ना आई, जब की पीया था मैंने हलाहल |
आज का ज्ञान खत्म हुआ, 
अब तुम भी घर जाओ |
और एक रामबाण सुन 
जिंदगी में जिसे ‘चाहो’ उससे कभी कुछ न ‘चाहो’ ||

             - फुद्दू

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