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कविताएँ भी साँस लेती हैं

Geeta TandonGeeta Tandon June 3, 2022
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मुझे लगा वो
सालों से दफ़न है
मर गई होगी
फिर भी न जाने क्यों
मैंने उसे खोलकर
देखना चाहा
उसपर जमी धूल को
जब हटाया
उसके पन्नों को
छूकर सहलाया
उसके शब्दों को
हौले से पढ़ना शुरु किया
और मैं सहम गई
जैसे-जैसे उसके
पन्ने पलटती गई
शब्दों की धड़कन
मेरी धड़कन के साथ 
शामिल होती गई।
उसकी आहट
मेरे दिल और दिमाग़ पर
असर डालने लगी
मुझमें एक कल्पना
जागने लगी
भावनाओं की धारा
उमड़ने लगी
मैं उन शब्दों से
बात करने लगी
और कुछ समय बाद
मुझे एहसास हुआ कि
यह तो ज़िदा है
पूरी तरह ज़िदा है...

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