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रूठे दोस्त को मनाऊ

इब्न-ए-बब्बनइब्न-ए-बब्बन May 29, 2022
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तेरे मेरे रिश्ते में कोई रंज नही
पाक प्यार है और कोई रंग नही
मिले हैं इतने सालो बाद
पुरानी यादें हैं और कोई अंग नही 

दोस्तों का नटखटपन है छेड़खानी है
रूठना मनाना है शिकवे गिले नही
कभी कोई ग़ुस्ताख़ी है तो माफ़ी भी है
शायद कभी ज़्यादती है प्यार में कमी नही

तू मुझसे रूठे मैं तुझे मनाऊँ 
खेल खेल के उसूल है उसूल निभायें
कोई बात दिल को ज़्यादा खली हो
खुलकर बात करें बात को आगे ना बढ़ायें

मैं और क्या कर सकता हूँ 
सिवा दोस्तीका फ़र्ज़ निभाने के
दोस्त बनके मिले थे दोस्त बने रहें
दोस्ती बरकरार रहें यही दुआ करूँ

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