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मेरी नज़्मों का इल्हाम

इब्न-ए-बब्बनइब्न-ए-बब्बन June 25, 2022
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मेरी नज़्मों का इल्हाम हो तुम, 
मेरे गीतों का बस प्राण हो तुम, 
मेरे साँसों की इक जान हो तुम, 
मेरे जीनेका इक नाम हो तुम 

ये ठण्डी हवायें लहरें, जब बाहोंमें बस हो तुम, 
फूलोंका रास्ता है जब, मेरे साथ अगर चल दो तुम,
तूफ़ानसे भी टकराऊँ, कश्ती में अगर बैठो तुम, 
एक कदमभी ना चल पाऊँ, गर हाथ मेरा यूँ छोड़ो तुम

सूने से मेरे जीवन में, बस एक ही तुम ही हो तुम, 
जीवन का पहिला प्यार हो, एक वो ही हो मेरी हो तुम, 
जीना फ़िज़ूल है जिसमें, जहां सब हो और ना हो तुम, 
जीना नहीं है अब तुम बिन, गर साथ ना आओगे तुम

मेरी नज़्मों का इल्हाम हो तुम, 
मेरे गीतों का बस प्राण हो तुम

इब्न ए बब्बन

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