मयखाना's image
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अफ़सोस इस बातका नही कि मयखाने जाते हमें देख लिया, 
लौट कैसे आये हैं, आपने ना कभी जान लिया ना देख लिया 

मयखाने जाके भी ना कभी शीशा उठाया, ना जाम को छुआ,
साकीने बहकाया, हमने शराबकी बूँदको भी ना कभी छुआ

तेरे दिये ज़ख़्म-ए-इश्क़ इतने है गहरे, शराबसे ना भरेंगे,
जुर्म-ए-इश्क़ किया है, सज़ा-ए~मौत हमने क़बूल भी किया

पीना ही है, तो शराब से ना काम चलाया, ज़हर ही पी लिया,
बे-असर इलाजसे नही, एक ही घूँट में काम तमाम कर लिया

इब्न ए बब्बन

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