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कितना नजदीक है और कितना पास है,
ना कह सकता हूं तुझे इतना खास है,
एक ओर सहमा सा सांस है ,
एक ओर असाध्य है।

है अवसरों में, संभावनाओं में , विकारों में,
पन पनाते मन के सारे धारो में,
ऊंचे - ऊंचे डालों में,
गहराईयों में पातालों में।

यात्रा जो है और नहीं है............

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