संसारी's image
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ये संसारी बस आईना दिखाता है,
यथार्थ में मसाला लगाता है,
छाया मात्र को सत्य बताता है,
तर्को का झाड़ उगाता है।
इन्हें छाया में गुरुर है,
ये फ़ालतू मे मजबूर हैं,
वेदना का उठता लहर,
फूल का भ्रम टूटा , दिखता काटो का कहर।
खुद के भ्रांत को इनका समझ नहीं,
कहते है ये जीवन दर्द से कम नहीं।
आओ हमारे प्रकाश कि ओर,
पकड़ाता हूं तुम्हे सत्य का डोर।

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