प्रसांगिक's image
Share0 Bookmarks 11 Reads0 Likes
समझा सब है ,
नहीं समझता तो इशारों की क्या जरूरत,
कोई ऐसा नहीं है जिसने संकेत ना दिया हो ,
स्वाद तो रस का लेना है ,

बिमारी का कारण रस ही तो है ,
फिर भी कई प्रकार भोग तो जाते हो ,
सेवन किया होता जो निम का ,
दरवाजा खुल जाता सिम-सिम का ,

जानते सब है , अनुसरण नहीं करना ,
जलना उसको आता तप करता जो ,
विपत्ति का सोच नहीं भीड़ जाता जो ,
इतनों, इशारों से समझाया तनिक उधर जाते तो ,
निम का स्वाद बदल जाता जो गले लगाते तो ।

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts