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ये जो काया है सब माया है ,
उत्तेजकता छाया है ,
इसके आगे क्या कुछ नहीं ?
अभी मुझे पता नहीं
यदि पता है तो यकीन नहीं ,

नहीं तो क्यों दोहराता अपने आदतों को ,
यदि आदतों के पार विश्वास होता कहीं ,
मुझे बड़ा घमंड है खुद पर ,
मुझे लगता है शोर से मिलेगी शांति कहीं ,
थोड़ा चिंतन का विषय है ये ,
ये विषय इतना मामूली नहीं ,

अचूक से चूकना आसान नहीं ,
फिर भी चूक जाना ,
बहाना है , मजाक नहीं।

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