नासमझी's image
Share0 Bookmarks 42 Reads0 Likes
अभी अंधेरा है कदम संभाल ,
डग मग नौका , भवर उछाल ,
भ्रांत बात ना कोई सवाल ,
ईमानदारी बुनियादी ढ़ाल ।
समझ को समझ ना आता जब ,
मुमुक्षा टकराता लब लब ,
चीरत वही अंधकार नित ,
सहज धैर्य अंतर निहित ।

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts