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मेरे विचार में क्रांति

गणेश मिश्रागणेश मिश्रा January 7, 2023
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दहकता आग है जो उसे वो लौ कहते थे ,
विषय अज्ञान छानते थे ,
खूब समझते बूझते थे वो ,
ये प्रतीत है काफी अतीत है ,

उनके अनुसार आकार अलग था जगत का ,
आसमान मिल जाता था वो ठुकरा देते थे ,
ना ऊंचाई से संपर्क था और ना गहराई से ,
बहुत कठिनाई से भरा , बड़ा निर्बल हुआ सा जो ,
उसको उठाते थे बड़े तन्हाई से , 

ना ही अंजान थे वो और नहीं अज्ञान थे ,
अंजाम को जाम में मिला जला देते ,
इंसान ही की बात कर रहा हूं मैं ,
कुछ गिने चुने मनुष्यों में महान थे।

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