महाशिवरात्रि's image
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मृत्यु प्रकृति कि तय है ,
इस बात से फिर क्यों भय है ,
मिटाये ना मिटे जो कर्म हो ,
पिया संस्कृति के मर्म को ,
खुद जब शांति आता है ,
सारा विचलन चत्त हो जाता है ।
जीवन वो नहीं जो न रूतबा ,
जीवन को सही तो दो सज़दा ,
हर क्षण के कण जायेगा ढ़हर ,
आये जब महाकाल नगर ।

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