माॅं's image
Share0 Bookmarks 0 Reads0 Likes
जब माॅं आयी घर में ,
कुछ खाली था जो भर गया ,
अज्ञान हूं , अंजान भी ,
ऊर्जानवित , प्रभावित हुआ ।
दिशा बदला होगा कही ,
फिर सही राह मुख मोड़ गया ,
उड़ा लाछा चित्त का ,
प्रेरणा रस से जोड़ हुआ ।
जब माॅं आयी घर ,
मैं कहर घना को तोड़ गया ।

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts