हारा's image
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कल जितना कड़क था कडका ,
उससे दुगुना आज टूट गया मैं ,
फसा जाल था लगा मुझे बस ,
क्षण क्षण चाले जोड़ा है ,
घिरा जो चारो ओर प्रवेश से ,
कण कण भी ना छोरा रे ,
बांध लिया था जित को शाय़द ,
अब हार मिला दुख होया रे ।

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