घुलना's image
मित्रता नहीं तोड़ा , ना बात करना बन्द किया,
घुलता था जो हर होर में, घुलना थोड़ा कम गया।
बात करे , तो रोकता मन , आगे कुछ ना बोलता,
अकेला बाहर मौन मैं , भीतर बहुत हर होड़ता।

रहता गया रहता गया , सहता गया सहता गया ,
र,हत स,हत के मूल का , अंकुर जो था वो दिख गया।
बाहर जो है सब ठीक है , क्या बाहर का दोष दू ,
जुड़ता रहा बहोश जो , होश थोड़ा खिल गया,
सुख दुख सतह हम बीच में , सीमा सीधा अब खुल गया ,

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