एकजता's image
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मेरा इज्जत नहीं कर्म पर जोर ,
हवाई बात नहीं तथ्य पे जोर ,
इस ओर से उस ओर ,
फिरता ना कभी कोई राह और ।
जो सरल उसे कहना क्यों ,
कटु वचन कहने से मुकरना क्यूं ,
हर राह संकटें लाता यूं ,
अन्तरमन करता गुफ्तगू ।
मैं रण से हाथे चार करू ,
हारू पर पुनः वार करू ,
आधार कभी ना डोलेगा ,
चित्त अंगद भांति बोलेगा ।

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