दोनों (भाग-१)'s image
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दोनों कई जगहों में समान ,
विलोम द्वंद्वो के कमान ,
जड़ जिसका एक ही है ,
दूसरा शिरा को है वरदान ।

सार्थक जो ना करता है ,
उसी को वह जड़ता है ,
बुद्धियों पर छाया हुआ ,
ऐसा यह माया है।

दोहतरा बातें करता ,
एक से बचा तो एक धरा ,
शिरा इसके अनंत है ,
जाता ना गहरा ।

गहराई तो भाए नहीं ,
जमीन में पांव नहीं ,
फिसलना तय है यहां ,
गुमा जो दिशा यहां।

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