धूल's image
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बुने है तेरे याद , मैंने सनय-सनय से ,
कुछ को जी लिया , कुछ अरमण्य है ,
लगता है बस पास है , अभी तो दिल के दूर यें ,
हौसला मिटा नहीं , बदला गुरुर मैं ।
बीतते ही दिनों में , मरघट बदल गया ,
मिठी चाल चल गया , मैं फिसल गया ,
पुराने याद , जाहिर आज , कैसे हो गया ?
किस कराह बेपरवाह , मैं उलझ गया ।

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