चलते विचार's image
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पैरों तले झुकना है , दवाबो में उठना है ,
कचड़ो कि भांति में कमल सा मुझको उगना है ,
दवाब नहीं रहता जब , कुछ शंका रहता है ,
कही मुड़ ना जाये रुख हवा का , विचार चरता है ,
दफ्तर , जाने निकला हूं , क्यों ना लिखता चलू ,
आया है ये विचार तो फिर पूरा करता हूं।





                ~ गणेश मिश्रा

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