भीतरी स्वार्थ's image
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भीतरी स्वार्थ से खोला तहखाना ,
शुरूवाती था मिठास अब बदबुदाना ,
इतने पिशाच यहां तने खड़े है ,
देखते भर पिछे पिछे चलने लगे हैं।
खोला तो मजा में पछताना तो पड़ेगा ,
स्मृति जो बना उसे मिटाना तो पड़ेगा ,
जूझना नहीं वरना पुनः बांध देगा ,
आने जाने दो उसे छेड़ा तो चिढ़ेगा ।
तर्क से जकड़े , कभी दोष से जकड़ेगा ,
कभी प्यारा बने कभी गुरूर से तनेगा ,
बार बार लगातार आया तो करेगा ,
मनोबल टूटेगा तो दबाया भी करेगा ।

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