भीतर - बाहर's image
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क्या माया ? कितना डूबायेगी ,
बदलते तर्क दिखायेगी ,
टूटा कल्पना प्रतीत होके ,
पहले डूबाये फिर कहें क्यो डूबे।
एकाग्रता बिखरा लगता है ,
भारी विचार पिछड़ा लगता है ,
मन होशियार फिर हसता है ,
ये दुई प्रहार स्व घटता है ।
एक जगह युद्ध है रहा निखर ,
विश्व में संकट कोराखर ,
इस पर यदि फौरन प्रक्रिया नहीं ,
तब काल चलाए भुजाएं अपनी।

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