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है उस अज्ञान का , क्या होगा?
ये नहीं हुआ और वो नहीं हुआ ,
ये तो हो जाए , काम चल जाए ,
अंधकारमय प्रश्न-प्रश्न है ।

सांस - सांस आए , 
घबराहट , तीतर-बीतर करता जाए ,
कुछ पता नहीं है,
हाहाकार अंधकार।

मन डरता फिर चलता ,
कितना विचार दोहरा वार ,
टालता समय , अभी नहीं ,
डरता वहीं , जिसके पांव , जमीं नहीं।

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