भाषा's image
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भाषा खोने से डरता हूं , भाषा का मूल समझता हूं ,
सुक्ष्मता इस भाषा में है , निजी भाषा निज पाषाण से है,
भाषा धारणा बनाता है , समझ - बूझ जगाता है ,
संत समागम , गंगा , तिरंगा , निज भाषा से आता है।

भाषाएं भाई- जन बनाते हैं , मित्रता प्रेम फैलाते हैं ,
भाषा से जिसको गैर नहीं , भाषा अज्ञान का बैर यही ,
शिक्षा भावना जगाता है , भाषा जब समझ में आता है ,
भाषा ही ज्ञानता लाता है , मानवतारण कर जाता है।

जितना लिखता सब कम है ,
भाषा में इतना दम है।







             ~ गणेश मिश्रा 

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