प्रेम कविता's image
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सुनो!

तुम मेरी प्रेम कविता हो

और

तुम्हारा मुझसे प्रेम करना

उसमें श्रंगार रस का

संचरण होना है।


~ गजेन्द्र सिंह(अलिख)

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