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पुस्तक समीक्षा: “बेरंग लिफ़ाफ़े”

Gulsher AhmadGulsher Ahmad February 13, 2022
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पुस्तक समीक्षा: “बेरंग लिफ़ाफ़े”
लेखक: मनीष भार्गव
प्रकाशक : सन्मति पब्लिशर्स एण्ड डिस्ट्रीब्यूटर्स
पेज: 122
ISBN: 9789390539475

कहा जाता है कि एक लेखक को वही लिखना चाहिए जो वो अपने जीवन में महसूस करता है और अनुभव करता है। इससे ये बेहतर होता है कि वो हर एक घटना और किरदार के साथ इंसाफ कर पाता है। "मनीष भार्गव" जी ने भी जब अपनी पहली पुस्तक लिखनी शुरू की तब वो अपने अनुभव को लिखना ही बेहतर समझा है और बहुत बेहतरीन तरीके से इसे लिखा भी है। नवोदय विद्यालय में पढ़ा और मध्य प्रदेश के अलग-अलग विभागों में 5 वर्षों तक काम करने के बाद अभी दिल्ली के शिक्षा विभाग में शिक्षक के पद पर कार्यरत हैं।

अपनी पहली पुस्तक "बेरंग लिफ़ाफ़े" में इन्होंने पूरी तरह से नवोदय विद्यालय के जीवन को लिखा है और साथ ही साथ मध्य प्रदेश के अलग-अलग विभागों में काम करने के अनुभवों को भी इसमें बहुत अच्छे से लिखा है। अपनी क़लम को बिना किसी झिझक के और निडर होकर चलाया है। सिस्टम में होने वाले भ्रष्टाचार पर अपनी क़लम को पूरी तरह से चलने दिया है।

कहानी दिल्ली के एक सरकारी दफ़्तर से शुरू होती हैं जहाँ कहानी का मुख्य किरदार "पंकज जैन" काम करता है। वैसे तो जनवरी 7, 2020 से शुरू हो रही कहानी बहुत पहले शुरू हो जाती है। इस दिन पंकज के दफ़्तर में दो पुलिस वाले एक केस के सिलसिले में पूछताछ के लिए आते हैं और पंकज के अतीत को खंगालने की कोशिश करते हैं। इसी में असली कहानी शुरू होती है। पंकज के अतीत की कहानी। इस पुस्तक "बेरंग लिफ़ाफ़े" की कहानी।

कहानी फिर से शुरू होती है पंकज के बचपन की। उसके घर की। उसके पिता की। उसके पिता कैसे गांव छोड़कर शहर जा बसते हैं। गांव में उसके पिता पटवारी को घुस देकर भी अपनी ज़मीन नहीं बचा पाते हैं। जब बात बाल-बच्चों के जीवन पर आ जाती है तब वो गाँव और अपनी ज़मीन छोड़ कर शहर चला जाता है। वहाँ पंकज जवाहर नवोदय विद्यालय के दाखिले का इम्तेहान पास करके नवोदय विद्यालय में प्रवेश करता है। फिर उसके बाद आगे की पढ़ाई और नौकरी करता है। 

आपको ये पढ़ना बहुत रोमांचित करेगा कि आख़िर पंकज के अतीत में क्या घटना घटी है कि आज उसे खंगाला जा रहा है। पंकज का अतीत कैसा रहा है? लेखक ने मुख्य किरदार पंकज की प्रेम कहानी भी लिखी है जो पढ़ते हुए चेहरे पर कभी मुस्कुराहट तो कभी उदासी छाई रहेगी। पंकज के अतीत और वर्तमान के बीच में देश प्रदेश के प्रशासनिक अधिकारियों और उनके द्वारा किए जाने वाले भ्रष्टाचारों पर खूब बेहतरीन तरीके और बहुत पारदर्शिता से लेखक ने अपनी बात रखी है। 


लेखक का परिचय: 
मनीष भार्गव का जन्म मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले की नरवर तहसील के ग्राम पंचायत सोनहर में मध्यमवर्गीय कृषि परिवार में हुआ। इनकी प्रारंभिक शिक्षा जवाहर नवोदय विद्यालय पनघटा (नरवर) जिला-शिवपुरी से हुई। इन्होंने जीवाजी विश्वविद्यालय, ग्वालियर से गणित व शिक्षाशास्त्र में स्नातक तथा इतिहास, अर्थशास्त्र व कंप्यूटर से परास्नातक की उपाधि हासिल की। यह वर्तमान में शिक्षा विभाग दिल्ली सरकार में परामर्शदाता शिक्षक व गणित अध्यापक के पद पर कार्यरत हैं। इससे पूर्व इन्होंने मध्य प्रदेश शासन के अलग-अलग विभागों में 5 वर्ष से अधिक समय तक अपनी सेवाएँ दी हैं। यह ‘वोकल’ एवं ‘बोलकर’ जैसे कई डिजिटल प्लेटफार्म पर एक प्रेरक वक्ता के रूप में लोगों को मार्गदर्शन करते हैं, जहाँ इन्हें 4 करोड़ से ज्यादा बार सुना गया है।

आपको ये किताब क्यों पढ़नी चाहिए?

हम हमेशा कुछ ऐसा जानना चाहते हैं कि सरकारी दफ्तरों में अच्छे से अच्छा आदमी जाकर भी कैसे भ्रष्टाचार के जाल में फंस जाता है? इसका जवाब आपको इसमें मिलेगा। 
हमें हमेशा लालच होता है कि सरकारी नौकरी कर लें; सरकारी दफ़्तर में नौकरी करना सबको आसान लगता है और समाज में एक अलग पहचान भी बनती है लेकिन किस-किस तरह की परेशानियाँ आतीं हैं वो भी जानने और समझने के लिए ये पुस्तक आपको ज़रूर पढ़नी चाहिए। प्रशासनिक अधिकारियों के संघर्ष की कहानी है "बेरंग लिफ़ाफ़े"

आपको किताब में क्या कमी लग सकती है?

मुझे नहीं लगता कि इस पुस्तक में किसी पाठक को कमी देखने को मिले लेकिन जिस तरह से इस पुस्तक के मुख्य किरदार को बताया गया है और उसको विस्तृत रूप से लिखा गया है वो थोड़ा सा मन को कचोटता है। कहानी जिस केस से शुरू होती है और जिस तरह समाप्त होती है ये शायद आपको थोड़ा सा अलग और छोटी लगे। दरअसल ये कहानी आपको अपने स्कूल के जीवन को फिर से जीने का मौका है।

इस किताब से कुछ पंक्तियां जो बेहद ख़ूबसूरत हैं।

1. शायद यह शासकीय कार्यालयों का अनिवार्य सत्य है कि वहाँ पर पद-सोपान बहुत ज़्यादा ज़रूरी होता है या यूं कहें कि पद हमेशा कार्य से बड़ा माना जाता है।

2. जिस प्रकार लोक प्रशासन में पद-सोपान उपर से नीचे की तरफ आता है, उसी प्रकार ज़िम्मेदारी और वेतन भी ऊपर से नीचे की तरफ घटता हुआ माना जाता है लेकिन असफलता या कमी नीचे से ऊपर की ओर घटती हुई मानी जाती है।

3. जिस प्रकार युद्ध में बिना ऑडिट के पैसे दिए जाते हैं, उसी प्रकार इलेक्शन का फंड आता है।

4. ज़िन्दगी वही है जो हम जी रहे हैं। वो नहीं जो आने वाली है या जो हम जी चूकें हैं।

5. आपके साथ भविष्य में क्या होने वाला है, यह आपको नही पता लेकिन समय इन सब बातों से परिचित है। इसीलिए हमेशा समय आपके सामने नए नए नाटक या घटनाएं बनाता है ताकि आप अपना निर्णय बदल सकें।


समीक्षा गुलशेर अहमद के द्वारा लिखा गया है। आप पुस्तक यहां से प्राप्त कर सकते हैं: https://amzn.to/3sEoYZ4

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