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यहाँ, हमारा घर था

दुर्गेशदुर्गेश May 12, 2022
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एक मोर कटे जंगल को देख कर क्या कहता?

यहाँ, हमारा घर था। 
तुम्हारे बनने वाले शीश महल की तरह आलिशान तो नहीं था लेकिन उस से कहीं कम भी नहीं था।
यहाँ, हमारा घर था।
जब मेघ घिर-घिर आते थे और बादल शोर मचाते थे मैं अपने पंख फ़ैला कर यहीं नाच दिखाता था।
यहाँ, हमारा घर था।
शायद तुम्हारे बनाए मकान की ऊंचाई यहाँ के कटे पेड़ों से भी ऊंची हो लेकिन वह हमारा गौरव था।
यहाँ, हमारा घर था।
अपने स्वार्थ के खातिर ऐ इंसान जो तूने हमारा प्यारा सा बसेरा उजाड़ दिया, हमने तेरा क्या बिगाड़ा था?
यहाँ, हमारा घर था।

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