धूप में's image
Share0 Bookmarks 10 Reads0 Likes

तलाश है इक दरख़्त की इस तपती धूप में,

तमन्नओं से है राह-ए-हयात सुलगती धूप में!


है क़ौस-ए-क़ुज़ह निकला हुआ इस बाराँ में,

लगता है कोई बदली आई बिलखती धूप में!


ज़ुल्फ़ें ये आपकी दिल को है बाँधती "क़ैस",

दिखीं हैं काकुल-ए-शब-गूँ निकलती धूप में!

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts