रक्षा बंधन's image
Share0 Bookmarks 20 Reads1 Likes

भगिनी करती भाई की,

मीठी सी मनुहार।

वात्सल्य परिपूर्ण स्नेहिल,

राखी का त्योहार।


नेह के धागे में बंधे,

ममत्व कुसुम कचनार।

भाई की कलाई पर,

बहन सजाती बंदनवार।


धवल श्रावणी पूर्णिमा,

आत्मजा है तैयार।

घर आंगन में मनता,

राखी का त्योहार।


कर्मवती भेजी हुमायूं को,

पावन रक्षक तार।

धर्म बंधन तोड़ी थी,

राखी पहली बार।


केशव भी रक्षक धर्म में,

नेह बंधन से बंधकर।

असीम कर दिए,

द्रोपदी का चीर।


डॉ. भगवान सहाय मीना

बाड़ा पदमपुरा, जयपुर, राजस्थान।




No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts