रक्षा बंधन's image
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भगिनी करती भाई की,
मीठी सी मनुहार।
वात्सल्य परिपूर्ण स्नेहिल,
राखी का त्योहार।

नेह के धागे में बंधे,
ममत्व कुसुम कचनार।
भाई की कलाई पर,
बहन जाती बंदनवार।

धवल श्रावणी पूर्णिमा,
आत्मजा है तैयार।
घर आंगन में मनता,
राखी का त्योहार।

कर्मवती भेजी हुमायूं को,
नेह रक्षक का तार।
धर्म भेद को तोड दी,
राखी पहली बार।

केशव भी रक्षक बने,
भ्रात धर्म से बंधकर।
असीम कर दिए,
द्रुपद सूता का चीर।

डॉ. भगवान सहाय मीना
बाड़ा पदमपुरा, जयपुर, राजस्थान।

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