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अटल बिहारी वाजपेई

Dr.Bagwan Sahay MeenaDr.Bagwan Sahay Meena August 17, 2022
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शीर्षक- अटल 
विधा - कविता
दिनांक -16/08/2022
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मेरे बुद्धि कोष में शब्द नहीं,
जिनसे महिमा का गान करूं।
अटल शाश्वत बांके बिहारी,
रत्न को क्या रत्न अर्पित करूं।

वाणी जिनकी गूंजती संसार में,
युग पुरोधा को शत् शत् नमन करूं।
भारतीय संस्कृति की अटल परिभाषा,
नैतिकता के शब्द कोष को याद करूं।

भारतीय साहित्य सागर में अमृत,
ईश विभूति हिंद नाथ को नमन करूं।
नहीं भाषा में सामर्थ्य चरित्र गान करे,
संसद शिरोमणि राष्ट्रीय गौरव का बखान करूं।

डॉ. भगवान सहाय मीना 
बाड़ा पदमपुरा जयपुर राजस्थान।

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