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ज़िंदगी तेजी से भाग रही...

Dr. SandeepDr. Sandeep November 14, 2021
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कभी लगता है ज़िंदगी बहुत तेजी भाग रही

कभी लगता वो छुपकर ख़िड़की से झांक रही

कभी लगता है वो मेरी आँखों में जाग रही

ना जाने क्या मेरी ख़ामोशियों में ताक रही

इस दिल में उठते जज़्बातों को ग़मनाक रही

लग रहा मेरी दिली ख़्वाहिश को हलाक रही

घात लगाकर मेरे वक़्त-ए-अजल को ताक रही

दिल में उठते जज़्बातों को पर्दों से ढांक रही

मेरे दिल में उठी बेचैनी की हदों को आँक रही

चुपके-चुपके मेरी जीने की तमन्ना ख़ाक रही

#तुष्य

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