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वो सूखा हुआ गुलाब...

Dr. SandeepDr. Sandeep February 7, 2022
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आज फ़िर उनके आलम-ए-तसव्वुर ने सताया है मुझे

जैसे सहरा-ए-दिल में दो बूंद इश्क़ ने तरसाया है मुझे..

आज जब सुनहरी यादों के पन्नों को पलट कर देखा

उसमें रखा हुआ वो सूखा गुलाब नज़र आया है मुझे..

उस मुरझाए गुलाब की ख़ुशबू से खिल उठा दिल मेरा

उसको देख आँखों के सामने बिता कल नज़र आया है मुझे..

ये सूखा गुलाब तेरा साथ आज भी मुझे महसूस करता है

क्योंकि इसमें कोई और नहीं तेरा प्यार नज़र आया है मुझे..

इस सूखे गुलाब की पंखुड़ियों को ता-उम्र सजा कर रखूँगा

इन पंखुड़ियों के बीच मेरा चाँद जो नज़र आया है मुझे..!!

#तुष्य

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