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तुम मुझे न समझ पाए...

Dr. SandeepDr. Sandeep February 1, 2022
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ये जो दबी दबी सी आहें हैं

दिन रात दिल को तड़पाएँ हैं

हम लफ़्ज़ समझते हैं उनके

पर वो मुझको समझ न पाएँ हैं..!!

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हम अल्फ़ाज़ पिरोते हैं उनके

वो देते ख़ामोशी भरी सदाएँ हैं

मुन्तज़िर थे हम उनके कब से

पर वो ही फेर लेते निगाहें है..!!

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तुझको सब पता है मेरे ख़ुदा

हम दोस्ती बखूबी निभाएँ हैं

पर यार मेरा ना जाने क्यों

मुझपर ही इल्ज़ाम लगाएँ हैं..!!

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वो जितनी नफ़रत कर ले मुझसे

पर ये दिल उस को ही चाहें हैं

मेरी सहव-ए-क़लम सुधारने वाले

तेरे लिए मेरी खुली हुई बाहें हैं..!!

#तुष्य




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