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तू गंगा की धारा मैं नदी का किनारा...

Dr. SandeepDr. Sandeep January 3, 2022
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तू गंगा की प्रचँड वेग सी बहती धारा

मैं नदी के छोर का कटता हुआ किनारा..

रोज़ आती है तू मुझसे आज़माइश करने

मैंने टूट कर भी तेरी लहरों को उभारा..

तेरे इन थपेड़ों की आदत सी हो गई मुझे

पर मैं ही बनता रहा तेरी मौजों का सहारा..

जब भी तेरी हिम्मत को तूफ़ानों ने ललकारा

तेरी तरँगों को बचाने में मैंने खुद को वारा..

तेरे अक्षुण्ण प्रवाह के लिए तुझमें समाया साहिल

पर याद रहेगा वो वक़्त जो तेरे साथ था गुज़ारा..!!

#तुष्य

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