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तकलीफ़-ए-ज़िंदगी...

Dr. SandeepDr. Sandeep April 19, 2022
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मौत को तो लोगों ने यूँ ही बदनाम कर रखा है

रोज़ नई तकलीफ़ तो ज़िंदगी ने ही ज़्यादा दी है..

जिंदगी के बाद मौत ही तो गले लगाती है

फिर भी हर पल ज़िंदगी ही हमें डराती है..

आसान नहीं ज़िंदगी बहुत चोट खानी पड़ती है

कई बार जीते जी मौत ही गले लगानी पड़ती है..

इंसान को मौत नहीं उसकी ज़िंदगी ही मारती है

इसी फ़िक्र की वजह सेही इंसानी ज़िंदगी हारती है..

मौत तो अपने आगोश में चैन की नींद सुलाती है

ज़िंदगी ही है जो ताउम्र बस ख्वाबों के पीछे भगाती है..!!

#तुष्य

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