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साक़ी-ए-मयख़ाना…

Dr. SandeepDr. Sandeep December 16, 2021
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साक़ी देख ज़माना कैसी तोहमत लगाता है

आँखें तेरी नशीली पर शराबी मुझे बताता है..

मैं तो सिर्फ़ तेरे तसव्वुर का बहाना ढूँढता हूँ

पर वो मुझे शराबी कहकर मेरा पीना छुड़ाता है..

कहने को तो यहाँ हर कोई लगता बहुत प्यासा है

पर मेरे ही पीने पर ना जाने क्यों शोर मचाता है..

कैसे समझाऊँ लुत्फ़ पीने में नहीं खो जाने में है

पर वो मय-ख़ाने से तौबा करने को समझाता है..

ज़िंदगी का मज़ा मयख़ाने में दावत-ए-शीराज़ का है

पर कहकर मुझको अय्याश वो मेरा दिल दुखाता है..!!

#तुष्य

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