सफ़र-ए-ज़िंदगी (Part:6)...'s image
Poetry1 min read

सफ़र-ए-ज़िंदगी (Part:6)...

Dr. SandeepDr. Sandeep May 27, 2022
Share0 Bookmarks 341 Reads2 Likes

काफ़िराना सी हो गई थी ज़िंदगी हमारी

मौज़ूदगी ने तेरी आशिक़ाना बना दिया..

---

ज़िंदगी से मिला जो ज़ख़्म-ए-ताज़ियाना

दिल में इश्क़ का आशियाना बसा दिया..

---

तेरे अल्फ़ाज़ों ने मुझे कर दिया कायल

क़लम ने तेरी मुझे दीवाना बना दिया..

---

लिखते हो जो तुम दिल के एहसासों को

नज़्मों ने तेरी मुझे सूफियाना बना दिया..

---

मुझे सँभालना तुम मेरा हाथ थाम कर

साथ ने तेरे ये सफ़र सुहाना बना दिया..!!

#तुष्य

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts