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सफ़र-ए-ज़िंदगी (Part:3)...

Dr. SandeepDr. Sandeep November 3, 2021
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इस राह-ए-सफ़र में जो तू मेरी हमसफ़र हो जाए

बीत जाएँ ये ख़ूबसूरत पल जो तू रफ़ीक़-ए-सफ़र हो जाए..

बहुत दर्द से गुज़रा हूँ ज़िंदगी की इन अनजान राहों पर

अब तू साथ चले तो मेरा दर्द-ए-ग़म कसर हो जाए..

मेरे दिल की धड़कनों को तुमने धड़कना सीखा दिया

अब जब भी दिल से याद करूँ तुझको ख़बर हो जाए..

तेरे शहर से गुज़र रहा हूँ एक मुसाफ़िर की तरह

अगर तू चाहे तो तेरे आसमाँ के नीचे गुज़र-बसर हो जाए..

मेरे दिल की आवाज़ का बस तेरे दिल में असर हो जाए

मैं तेरे नाम हो जाऊँ और तू मेरी शरीक-ए-सफ़र हो जाए..!!

#तुष्य

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