सफ़र-ए-ज़िंदगी (Part:2)...'s image
Poetry1 min read

सफ़र-ए-ज़िंदगी (Part:2)...

Dr. SandeepDr. Sandeep October 30, 2021
Share0 Bookmarks 98 Reads1 Likes

ख़ामोशी से ज़िंदगी बसर कर रहा हूँ

ख़्वाबों के फ़लक पर सफ़र कर रहा हूँ..

राह पर हर एक रंज-ए-सफ़र उठाते हुए

जिस्म पर गर्द-ए-सफ़र मफ़र कर रहा हूँ..

जब से इश्क़ की इमारत ग़मों ने ढाई

टुकड़ो-टुकड़ो ज़िंदगी बसर कर रहा हूँ..

अब उनको इक पल साथ नहीं गवारा मेरा

अब दौर-ए-अय्याम में राह-ए-गुज़र कर रहा हूं

उनके हसरत-ए-दीदार को तरस गई आँखें

ये नज़्म मेरे मुर्शिद को नज़र कर रहा हूँ..!!

#तुष्य


No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts