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रिश्तों का बाज़ार...

Dr. SandeepDr. Sandeep December 18, 2021
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बिकता है हर शख़्स यहाँ, रिश्तों के बाज़ार में

नहीं बिकता वो रिश्ता, जो है दिल-ए-गुलज़ार में..

फ़र्क नहीं पड़ता उनको, जो रहते नहीं इंतज़ार में

हम तो रहते हैं यार, बस तेरे हसरत-ए-दीदार में..

अपने पन का झूठा दावा करते, जाएँ वो ग़ार में

मैं तो खड़ा हूँ सबसे आगे, आशिक़ों की क़तार में..

लोग बेचते यहाँ ख़ुद को, ख़्वाहिशों के बाज़ार में

हम तो बिकते हैं यार, बस हुस्न के बाज़ार में..

मेरी तो दुनिया तुझसे, बाकि दुनिया जाए भाड़ में

मुझको नहीं कोई परवाह, इस मायावी संसार में..!!

#तुष्य

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