हमदर्द मेरे नाराज़ न होना…'s image
Poetry1 min read

हमदर्द मेरे नाराज़ न होना…

Dr. SandeepDr. Sandeep January 21, 2022
Share0 Bookmarks 185 Reads3 Likes

सुनो हमदर्द मेरे मुझसे नाराज़ न होना

मुझे अज़ीब सी आदत है भूल जाने की

मुझ ख़तावार की ये गलती माफ़ करना

नहीं थी कोशिश तुम्हारा दिल दुखाने की..!!

मैं तेरे ग़ैरत-ए-जज़्बात पहचान ना पाया

नहीं थी हरकत तुझे तकलीफ़ पहुँचाने की

मुनासिब हो तो सितमगर को माफ़ करना

नहीं थी शरारत हम-सफ़ीर तुझे सताने की..!!

मुझ अहल-ए-क़लम से यूँ मुँह ना मोड़ना

मान जाओ तुम्हें क़सम अपने दोस्ताने की

तेरे लिखे लफ्ज़-ए-जज़्बात को पहचानता हूँ

तेरे सिवा नहीं कोशिश और किसी को मनाने की..!!

#तुष्य

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts