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कुछ तुम कहो...

Dr. SandeepDr. Sandeep February 19, 2022
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चलो आज आपके हर लफ़्ज़, हर अल्फ़ाज़ सुनते हैं

आपके साथ बिताए गुज़रे लम्हों को यादों में बुनते हैं..

इन आँखों में बसे ख़्वाब सैल-ए-अश्क़ में बह न जाएं

चलो सबसे पहले आँखों में बिख़रे हुए सपने चुनते हैं..

उजड़ी हुई गुलिस्तान ए ज़िंदगी को सँवारने के लिए

चल आ इस छोटे शहर में फ़िर अपनी दुनिया बुनते हैं..

पर इस दुनिया का देखो कितना ही अजीब दस्तूर है

उदासी पर सवाल करते मुस्कुराऊँ तो जलते-भुनते हैं..

यहाँ लोग जो सुन ना चाहते हैं वो ही सिर्फ सुनते हैं

पर हम बाग़-ए-इश्क़ में गुल-ए-चमन को चुनते हैं..!!

#तुष्य

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