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कहाँ हो राम...

Dr. SandeepDr. Sandeep November 4, 2021
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मैं अज्ञान के अँधेरों से घिरा हुआ हूँ, मुझे अँधेरे से उभारो राम..

जैसे अयोध्या को रोशन किया, मेरा भी घर-बाहर संवारो राम..

दुखियों के तुमने आँसू पोंछे, मेरे ग़म के आँसू मिटा दो राम..

दुनिया को जीने की कला सिखाई, मुझे भी जीना सीखा दो राम..

कहाँ खो गया हूँ पता नहीं, मुझे खुद को खुद से मिलवा दो राम..

अँधेरे की काली चादर में लिपटा हूँ, मुझको रोशनी दिखा दो राम..

तन से मोह लगा बैठा हूँ, भीतर का आत्मज्ञान दिला दो राम..

भक्तों के हृदय में बसते हो, मेरे हृदय में भी बस जाओ राम..

सुख में हर पल तुमको याद किया, दुख-दर्द मेरे मिटा दो राम..

जैसे केवट को तार दिया, मुझको भी भवसागर पार करा दो राम..!!

#तुष्य


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