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जल्द मिलेंगे...

Dr. SandeepDr. Sandeep November 12, 2021
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दर्द-ए-दिल देकर वो पूछते हैं मेरे दिल-ए-बेताब का हाल

ख़ुद हाल-ए-दिल छुपाते हैं मुझे कहते मेरा दिल है बेहाल

मेरे दिल-ए-नादाँ ने तो कह दिया मैं ही हूँ तेरा महींवाल

अब तुम जानो ख़ुदा जाने लो मेरे दिल-ए-ज़ार को सँभाल

जब तुम मिलोगी तो जानेंगे कैसा है तुम्हारे दिल का हाल

फ़िर क्यों तुम उठाती हों मेरे वक्त-ए-मुलाक़ात पर सवाल

जानता हूँ इश्क़ और इबादत दोनों में तुम तो हो बेमिसाल

पर ना कर मेरी मोहब्बत पर शक-ओ-शुबह और सवाल

जिस दिन मुलाक़ात होगी फ़िर न सकोगी खुद को सँभाल

अब तुम बताओ कब बनाने जा रही हो मेरा जीवन ख़ुशहाल..!!

#तुष्य

दिल-ए-ज़ार: घायल दिल

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