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हुस्न-ए-लाज़वाब...

Dr. SandeepDr. Sandeep December 28, 2021
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लाल कुर्ती में हुस्न-ए-लाज़वाब हो तुम

बिना मेकअप ख़ूबसूरत बेहिसाब हो तुम..

बगैर तुम्हारे मेरे अल्फ़ाज़ अधूरे रहते हैं

मुझ शायर का मंज़िल-ए-ख़्वाब हो तुम..

बेशक मुझ अहल-ए-क़लम से थोड़ा दूर हो 

दिल की नज़र से देखो कितने पास हो तुम..

तेरे लफ़्ज़ों की ख़ुशबू बसी है मेरी साँसों में

साहिब-ए-क़लम नज़्मों में लाजवाब हो तुम..

मैं डिब्बी में बंद जुगनू सा जगमग करता हूँ

पर बाम-ए-फ़लक पर दमकता माहताब हो तुम..

मरीज़-ए-मोहब्बत बन गया हूँ तेरे ख़यालों में

मुझ दिल-ए-ज़ार का आब-ए-हयात हो तुम..!!

#तुष्य

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