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फ़िर सवेरा होगा...

Dr. SandeepDr. Sandeep December 26, 2021
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दिल जलाने से ना कभी दूर अँधेरा होगा

रात ढल जाएगी मुस्कुराइए फ़िर सवेरा होगा..

ये ख़ुदगर्ज़ है ज़माना जाने न फ़र्क साहब

ये ना कभी मेरा था और ना कभी तेरा होगा..

कहने को तो यहाँ ग़म-ख़्वारी दिखाते हैं सारे

अँधेरों में छिपा रहबर शायद कोई लुटेरा होगा..

रख हिम्मत हौसला न हार मुश्किलें होगी पार

नई शक्ति नई उमंग नई उम्मीदों का घेरा होगा..

सफ़र-ए-हयात में फ़िर किसी के साथ बसेरा होगा

रात ढल जाएगी मुस्कुराइए फ़िर सवेरा होगा..!!

#तुष्य

ग़म-ख़्वारी: हमदर्दी, सफ़र-ए-हयात: ज़िंदगी का सफ़र

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